
કળિયુગ

સાંસારિક વાતો



જીવન નો ભૂતકાળ સાથે રાખી ને આગળ ચાલવું ઘણું તકલીફ આપતું હોય છે, અને ભવિષ્ય નો વિચાર અને ચિંતા કદાચ વર્તમાન ને ઊંડે ઊંડે જણજોડી નાખે છે. ઉકેલ એક જ છે, વર્તમાન ને વર્તમાન માં રાખી ને એને વર્તમાન માં જ જીવો. ભૂત-ભવિષ્ય ની વચ્ચે વર્તમાન. એ ન્યાય આપો.

एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा.
संत ने किसान से कहा , ” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर के बीचो-बीच जाकर रख दो .” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया.
तब संत ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ”
किसान वापस गया पर तब तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे. और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा. तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है,तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते.
इस कहानी से क्या सीख मिलती है:
कुछ कड़वा बोलने से पहले ये याद रखें कि भला-बुरा कहने के बाद कुछ भी कर के अपने शब्द वापस नहीं लिए जा सकते. हाँ, आप उस व्यक्ति से जाकर क्षमा ज़रूर मांग सकते हैं, और मांगनी भी चाहिए, पर human nature कुछ ऐसा होता है की कुछ भी कर लीजिये इंसान कहीं ना कहीं hurt हो ही जाता है.
ब आप किसी को बुरा कहते हैं तो वह उसे कष्ट पहुंचाने के लिए में वो आप ही को अधिक कष्ट देता है. खुद को कष्ट देने से क्या लाभ, इससे अच्छा तो है की चुप रहा जाए.
વર્ષા રાણી આવી છે,
લીલી ચાદર લાવી છે,
નદીઓ ખળ ખળ વહેતી છે,
વર્ષા ઝર મર વરસી છે,
સુર ગગન માં રેલાય છે,
ખુશીઓ માં સૌ મલકાય છે,
મીઠી ખુશ્બુ ઘણી આનંદદાયી છે,
વર્ષા તું સાક્ષાત જીવનદાદાયીની છે.
-પ્રાચી ભટ્ટ
बारिश तेरी बूंदे जब धरा को छू जाती है,
झूम उठती है धरा,बस तू महक फैलाती है।
बारिश तेरी बूंदे जब मन को भा जाती है,
मुस्कुराता है जहा, तू खुशी दे जाती है।
बारिश तेरी बूंदे जब दिल मैं बस जाती है,
खिल उठता है समा, और ख़ुशी की लहर छा जाती है।
बारिश तेरी बूंदे जब पलको पर गिरती है,
लगता है आज बांहे फैलाये कुदरत लिपटी है।
बारिश तेरी बूंदे यू टिप टिप बरसती है,
लगता है तीनों लोक में खुशी महकती है।
बारिश तेरी बूंदे, तुफानो से लड़ आगे चलती है,
एक हौसला अफजाई दिलो मैं तू दे कर जाती है।
बारिस तेरी बूंदे, खेतो मैं जब गिरती है,
धन्य हैं हर इंसान,जो दो पहर का खाना तू दे जाती है।
बारिश तेरी बूंदे हर एक आशिक पर जब गिरती है,
बस जाता है घर उनका, जब प्यार में भिगा तू देती है।
-प्राची भट्ट
ख्वाबो की गहराई मैं आऐ है फ़ुरसद से फर्श पर,
गहरे उतार-चढ़ाव वाले रहे जिंदगी के दिन,महीने ओर वर्ष,
मुकमल हो आने वाला पल, यही दुआ है तुमसे ऐ वक्त,
बस बेहतरीन यादे बनकर दे जा तू जीवन के हसीन पल।
-प्राची भट्ट

વીતી ગયો એ સમય જેમાં વેકેશન નો જણકાર રે,
ગિલી-ડંડા, સંતા કુકડી નો ગલિયો માં ખનકાર રે,
સાયકલ શીખવી, ઝાડે ચડવું-પડવું એનો મોઢે મલકાટ રે,
હવે ટેમ્પલ-રન ને મારિયો નો જ રઘવાટ રે,
ધૂળ માં રમવું, આખ મીચોલી એ ક્યાંય ન છલકાય રે,
બસ મોબાઈલ માં હવે પબ-જી, લુડો ની ભરમાળ રે,
સાંજ ટાણે નદી-પર્વત રમવાનો એ ઉન્માદ રે,
પણ હવે વિડીઓ ગેમ ને ટિક-ટોક નો કચવાટ રે,
બાળપણ ની માસૂમિયત નો ક્યાં એ ટમ-ટમાટ રે,
ભૂલ્યા એ ભૂલકાઓ ભોળપણ નો ભરમાળ રે.
-પ્રાચી ભટ્ટ