बेबसी

केसी बेबसी है,

जहा तु पास होकर भी दूर है,
ये कैसे जस्बात है,
जो दिल को जकड़े हुए है,
ये कैसी लाचारी है,
जो हम एक होकर भी एक नही है,
ये कैसी घुटन रिस्तो मैं,
जहा बेबसी के सिवा कुछ नही है

– prachi bhatt

तुम ही तुम

चाहत भी तुम,
आदत भी तुम,
सपना भी तुम,
मेरी हकीकत भी तुम,
मोत भी तुम,
ये जिंदगी भी तुम,
इबादत भी तुम,
मेरी बेबसी भी तुम,
मन की खुशियां भी तुम,
खामोशिया भी तुम,
यहा शब्दो मैं तुम,
मन के भीतर भी तुम,
दिल का दर्द भी तुम,
दिल का मरहम भी तुम,
मेरा सुख चैन भी तुम,
मेरा दर्द-ए-दास्तान भी तुम,
मेरी कहानियों मैं तुम,
सारे किस्सो मैं तुम,
सितारों मैं तुम,
मेरी बस्ती मैं तुम,
मेरे वजूद मैं हो तुम,
मेरी आँखों मे तुम,
मेरे होठो पर तुम,
और
बेवजह बातो मैं भी तुम,
मैं ही न रही मैं,
अब
सिर्फ तुम ही तुम।

-प्राची भट्ट

યોગા ડે / Yoga Day

સુપ્રભાત દોસ્તો.🌻🌻🌻આજે 21 જૂન 2020 યોગા ડે પર બધા ને સારું આયુષ્ય ને સ્વસ્થ જીવન રહે એવી શુભકામના.
Aje Sangit divas ni maja,
Uper thi ravivar ni raja,
Ane Grahan thi dare a bija,
Karnke apni sathe che pita
To kare ghar ma full day yoga
🌺🙏😊

जिंदगी अपने हिसाब से जिओ


न किसी की दुआओ पे जिओ,🙏🙋☝️

न किसी के दर्द मैं,😔🤷🤦

आपकि अपनी जिन्दगी है,😯👍👌

आप अपने हिसाब से जिओ।🌻😊🙂

-प्राची भट्ट

चाहत

तुम मुजे छु लो ,और मैं बस तुमहारी हो जाऊं,
बिना वक्त जाँया किये, मैं बावरी बन जाऊं,
आंखों का मिलन हो, मैं बस तुमपे वारी जाऊ,
आज अंधेरी रात मैं, प्यार की बारिश मैं बरसाउ,
वक्त की न तुजे फिक्र, तो तुम्हे क्यों अब मैं तरसाउ,
वक्त कहे, बंदिशे जब नही तो मैं भी हावी हो जाऊं।

-प्राची भट्ट

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