तुम मुजे छु लो ,और मैं बस तुमहारी हो जाऊं,
बिना वक्त जाँया किये, मैं बावरी बन जाऊं,
आंखों का मिलन हो, मैं बस तुमपे वारी जाऊ,
आज अंधेरी रात मैं, प्यार की बारिश मैं बरसाउ,
वक्त की न तुजे फिक्र, तो तुम्हे क्यों अब मैं तरसाउ,
वक्त कहे, बंदिशे जब नही तो मैं भी हावी हो जाऊं।

-प्राची भट्ट