
चाहत भी तुम,
आदत भी तुम,
सपना भी तुम,
मेरी हकीकत भी तुम,
मोत भी तुम,
ये जिंदगी भी तुम,
इबादत भी तुम,
मेरी बेबसी भी तुम,
मन की खुशियां भी तुम,
खामोशिया भी तुम,
यहा शब्दो मैं तुम,
मन के भीतर भी तुम,
दिल का दर्द भी तुम,
दिल का मरहम भी तुम,
मेरा सुख चैन भी तुम,
मेरा दर्द-ए-दास्तान भी तुम,
मेरी कहानियों मैं तुम,
सारे किस्सो मैं तुम,
सितारों मैं तुम,
मेरी बस्ती मैं तुम,
मेरे वजूद मैं हो तुम,
मेरी आँखों मे तुम,
मेरे होठो पर तुम,
और
बेवजह बातो मैं भी तुम,
मैं ही न रही मैं,
अब
सिर्फ तुम ही तुम।
-प्राची भट्ट
Nice composition ma’am👌
LikeLiked by 1 person
Thank you so much dear Yogesh 😊🙏
LikeLiked by 1 person