बारिश तेरी बूंदे…

बारिश तेरी बूंदे जब धरा को छू जाती है,
झूम उठती है धरा,बस तू महक फैलाती है।

बारिश तेरी बूंदे जब मन को भा जाती है,
मुस्कुराता है जहा, तू खुशी दे जाती है।

बारिश तेरी बूंदे जब दिल मैं बस जाती है,
खिल उठता है समा, और ख़ुशी की लहर छा जाती है।

बारिश तेरी बूंदे जब पलको पर गिरती है,
लगता है आज बांहे फैलाये कुदरत लिपटी है।

बारिश तेरी बूंदे यू टिप टिप बरसती है,
लगता है तीनों लोक में खुशी महकती है।

बारिश तेरी बूंदे, तुफानो से लड़ आगे चलती है,
एक हौसला अफजाई दिलो मैं तू दे कर जाती है।

बारिस तेरी बूंदे, खेतो मैं जब गिरती है,
धन्य हैं हर इंसान,जो दो पहर का खाना तू दे जाती है।

बारिश तेरी बूंदे हर एक आशिक पर जब गिरती है,
बस जाता है घर उनका, जब प्यार में भिगा तू देती है।

-प्राची भट्ट

Published by Mrs Bhatt

દુનિયા ને હૃદય થી જોવી ને આંખો ના પલકારે માણવી

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