लिखने पड़ी हु दिल के अहसास,
छिपा ना सकी वो दिल के जज्बात,
सुनी पड़ी है अब सारी रात,
कोई न पूछे मेरे दिल से हालात,
कई अरमान है किये दफन,
यह जख्मो का गुटन न हो सहन,
जि क्या रहे है तेरे बिन हम् सजन,
क्या बताऊँ हाल-ऐ दिल,
सिर्फ सांस ढल रही है तुम बिन सनम।
-प्राची भट्ट
दिल तक दस्तक देती खूबसूरत रचना।👌👌
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धन्यवाद मधुसुदन जी🙏😊
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आपकी कविताएं मन को छू लेती है ! वेरी nice poyem !
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जी बहोत बहोत धन्यवाद आपका। 😊
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