कितना भी कोशिश करले ये जालिम जमाना,
दिल मे जो बसा है, वो मै कभी निकाल नही सकता,
कमबख्त बेज़ुबा दिल है,जो बस कह नही सकता,
ये प्यार ही है मेहबूब जो तेरे लिए कभी घट नही सकता,
जो भी हो अंजाम, अब ये सेलाब मैं नही सह सकता,
बयान ऐ महोबत मैं तेरी, ये जान भी हु गवा सकता,
बस मैं ही नही हालात मेरे, अब क्या में कर सकता,
दिल मैं बनी तसवीर को मैं, निकल ही नही सकता,
जीना तो चाहा मगर , यादो मैं जी नही सकता,
ओर तेरी यादो के अलावा अब कही मेरा जी भी नही लगता।
-प्राची भट्ट
🙏🙏 शब्दों की गहराई को समजने के लिये धन्यवाद। 😊
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वाह क्या बात। बेहतरीन लिखा है।
कमबख्त बेज़ुबा दिल है,जो बस कह नही सकता,
ये प्यार ही है मेहबूब जो तेरे लिए कभी घट नही सकता,
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