ख़ामोश समंदर

में एक ख़ामोश समंदर,एल
दर्द समाये बैठा अपने अंदर,
बाहर दुनिया का शोर भयंकर,
कुछ एहसास दबाये रखे दिल के अंदर,
कह दो आंखों से,न बहे ये आँशु बनकर,
बहक गए तो रोक न पाऊ तूफानो सी लहर,
बेवज़ह हु बद्नाम फिरसे ,अब न दिखे कोई मंजर,
ख़ामोश ही रहने दो मुजे जैसे कोई शांत समंदर,
बस डर इस दर्द-ए-अहसास का, कही तबाही न मचाये ये सुनामी बनकर,
अफसोश मुज़े उतना, जितना ग़हरा ये समंदर,
समज न सका ये रिश्ता जिसे संभाला अपना बनाकर,
घाव बना ग़हरा, जब लगा धोखे का खंजर,
न कोई पास अब मेरे, ओर न कोई जग़ह दिल के भीतर,
छोड़ दो मुजे दुनिया वालो, मैं अब ख़ामोश समंदर।

-प्राची भट्ट

કાકી ના ઓટલે થી.

Published by Mrs Bhatt

દુનિયા ને હૃદય થી જોવી ને આંખો ના પલકારે માણવી

3 thoughts on “ख़ामोश समंदर

  1. सागर की लहर लहर में
    है हास स्वर्ण किरणों का,
    सागर के अंतस्तल में
    अवसाद अवाक् कणों का!
    यह जीवन का है सागर,
    जग-जीवन का है सागर;
    प्रिय प्रिय विषाद रे इसका,
    प्रिय प्रि’ आह्लाद रे इसका।
    जग जीवन में हैं सुख-दुख,
    सुख-दुख में है जग जीवन;
    हैं बँधे बिछोह-मिलन दो
    देकर चिर स्नेहालिंगन।
    जीवन की लहर-लहर से
    हँस खेल-खेल रे नाविक!
    जीवन के अंतस्तल में
    नित बूड़-बूड़ रे भाविक!

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