
उस सुहाने सफर मैं,
सब सुहाना लगा था,
तुम्हारा मेरे हाथो मैं हाथ,
सांसो की सरसराहट,
भीगे होठो की थरथराट,
दोनों के एक जज्बात,
ओर सुकून का अहसाह,
बन गयी हसीन लम्हो की रात।
-प्राची भट्ट
સાંસારિક વાતો

उस सुहाने सफर मैं,
सब सुहाना लगा था,
तुम्हारा मेरे हाथो मैं हाथ,
सांसो की सरसराहट,
भीगे होठो की थरथराट,
दोनों के एक जज्बात,
ओर सुकून का अहसाह,
बन गयी हसीन लम्हो की रात।
-प्राची भट्ट