जहा तु पास होकर भी दूर है,
ये कैसे जस्बात है,
जो दिल को जकड़े हुए है,
ये कैसी लाचारी है,
जो हम एक होकर भी एक नही है,
ये कैसी घुटन रिस्तो मैं,
जहा बेबसी के सिवा कुछ नही है
– prachi bhatt
સાંસારિક વાતો
जहा तु पास होकर भी दूर है,
ये कैसे जस्बात है,
जो दिल को जकड़े हुए है,
ये कैसी लाचारी है,
जो हम एक होकर भी एक नही है,
ये कैसी घुटन रिस्तो मैं,
जहा बेबसी के सिवा कुछ नही है
– prachi bhatt