कभी चाहते थे,
बिन मौसम बरसात हो,
होठो पर इकरार हो,
जहा हम-तुम ओर प्यारी बाते हो,
अभी चाहते हैं,
बादल यू ही भीगाते रहे,
प्यार ही प्यार बरसाते रहे,
तुजे मेरी बाहों मैं छुपाए रखे।
-प्राची भट्ट
સાંસારિક વાતો
कभी चाहते थे,
बादल यू ही भीगाते रहे,
प्यार ही प्यार बरसाते रहे,
तुजे मेरी बाहों मैं छुपाए रखे।
-प्राची भट्ट