
अपने दिल के अहसास,
वो सुनना चाहती हु मैं दिल के राज,
मत तड़पाओ मुजे तुम यु दिन रात,
कह भी दो वो दिल के जज्बात,
कबसे सुनने को हु मैं बेताब,
खोल भी दो अपने मन के द्वार,
मत रोको तुम मुजे ओ मेरे दिलदार,
हु मैं तुम्हारी,बस तुम्हरी ही खास,
बाहो मैं भर लो मुजे कस के तुम आज,
रोकने की खता बिल्कुल न होगी आज।
-प्राची भट्ट